संक्षिप्त परिचय
परिचय

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा एक अखिल भारतीय संस्था है, जिसकी स्थापना सन् 1936 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रेरणा से की गई।
इस संस्था का प्रमुख उद्देश्य सम्पूर्ण भारत में हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार करना तथा राष्ट्रीय एकता एवं भावात्मक एकात्मता को सुदृढ़ बनाना है।

भारत जैसे बहुभाषी देश में विभिन्न भाषाओं के बीच सम्पर्क स्थापित करने के लिए एक सरल, सर्वसुलभ और जन-स्वीकार्य भाषा की आवश्यकता थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में अपनाने का विचार प्रस्तुत किया गया।

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा

स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए संघर्षरत भारत में राष्ट्रभाषा की आवश्यकता को महसूस करते हुए महात्मा गांधी ने हिन्दी प्रचार का कार्य प्रारम्भ किया। दक्षिण भारत में 18 वर्षों तक हिन्दी प्रचार के पश्चात्, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, नागपुर अधिवेशन (1936) में यह प्रस्ताव पारित हुआ कि दक्षिण भारत को छोड़कर अन्य प्रदेशों में हिन्दी प्रचार हेतु एक संस्था स्थापित की जाए। इसी के फलस्वरूप 4 जुलाई 1936 को सेवाग्राम आश्रम, वर्धा में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति का गठन किया गया।

इस संस्था की स्थापना में अनेक महान नेताओं का योगदान रहा, जिनमें प्रमुख हैं:

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

पं. जवाहरलाल नेहरू

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस

राजर्षि पुरुषोत्तमदास टण्डन

आचार्य काका कालेलकर

सेठ जमनालाल बजाज

स्थापना एवं इतिहास

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारत में एक ऐसी भाषा की आवश्यकता महसूस हुई जो पूरे देश को जोड़ सके।
इसी उद्देश्य से महात्मा गांधी ने हिन्दी प्रचार का कार्य प्रारम्भ किया।

इस संस्था की स्थापना में कई महान विभूतियों का योगदान रहा, जैसे:

राष्ट्रभाषा की आवश्यकता एवं महत्व

भारत एक बहुभाषी देश है जहाँ अनेक भाषाएँ और बोलियाँ प्रचलित हैं।
इन सभी को जोड़ने के लिए एक सरल और सर्वसुलभ भाषा की आवश्यकता थी।
👉 हिन्दी इन सभी गुणों से युक्त है, इसलिए इसे राष्ट्रभाषा के रूप में अपनाया गया।

महात्मा गांधी का कथन:

“राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूँगा है।”

हिन्दी का महत्व:

उद्देश्य एवं कार्य

समिति के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

सम्पूर्ण भारत में हिन्दी का प्रचार-प्रसार

हिन्दी भाषा एवं साहित्य का विकास

राष्ट्रभाषा की परीक्षाओं का संचालन

पाठ्यपुस्तकों का निर्माण एवं प्रकाशन

हिन्दी माध्यम से शिक्षा की व्यवस्था

भारतीय भाषाओं के बीच सामंजस्य स्थापित करना

देवनागरी लिपि का प्रचार एवं प्रशिक्षण

अनुवाद एवं मौलिक साहित्य का सृजन

प्रमुख गतिविधियाँ

समिति निम्नलिखित कार्यों के माध्यम से अपने उद्देश्यों को पूरा करती है:

कार्यक्षेत्र एवं विस्तार

समिति का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण भारत में फैला हुआ है।
प्रारंभ में इसे विभिन्न क्षेत्रों में विभाजित किया गया:
बाद में विभिन्न राज्यों में प्रान्तीय समितियों का गठन किया गया, जिससे कार्य और अधिक संगठित हुआ।

समर्थन एवं सहयोग

हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने में कई समाज सुधारकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा:

इन सभी ने हिन्दी को जनभाषा के रूप में स्वीकार करने और उसके प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संगठन संरचना

समिति का संगठनात्मक ढांचा अत्यंत व्यापक है:

यह नेटवर्क पूरे देश में हिन्दी के प्रचार-प्रसार का कार्य निरंतर कर रहा है।

निष्कर्ष

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा ने भारत में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
यह संस्था आज भी राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समन्वय और भाषाई समृद्धि के लिए निरंतर कार्यरत है।

प्रान्तीय समितियाँ

समिति के अंतर्गत 23 प्रान्तीय समितियाँ कार्यरत हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

क्रमांक

समिति का नाम

स्थान

पिन कोड

1

असम राष्ट्रभाषा प्रचार समिति

जोरहाट (असम)

785001

2

पश्‍चिम बंग राष्ट्रभाषा प्रचार समिति

कोलकाता (प. बंगाल)

700026

3

उत्कल प्रान्तीय राष्ट्रभाषा प्रचार समिति

कटक (उत्कल)

753001

4

विदर्भ राष्ट्र भाषा प्रचार समिति

नागपुर (विदर्भ)

440010

5

सिन्ध-राजस्थान राष्ट्रभाषा प्रचार समिति

जयपुर (राजस्थान)

302003

6

मुम्बई प्रान्तीय राष्ट्र भाषा प्रचार सभा

मुम्बई (महाराष्ट्र )

400004

7

गुजरात प्रान्तीय राष्ट्र भाषा प्रचार समिति

अहमदाबाद (गुजरात)

380006

8

महाराष्ट्र  राष्ट्र भाषा प्रचार समिति

पुणे (महाराष्ट्र )

411002

9

मेघालय राष्ट्र भाषा प्रचार समिति,

शिलांग (मेघालय)

798 004

10

बेलगांव जिला राष्ट्र भाषा प्रचार समिति

बेलगांव

590 002

11

मराठवाडा प्रान्तीय राष्ट्र भाषा प्रचार समिति

औरंगाबाद (महाराष्ट्र )

431 002

12

मध्यप्रदेश राष्ट्र भाषा प्रचार समिति

भोपाल (मध्यप्रदेश)

462 002

13

मणिपुर राष्ट्र भाषा प्रचार समिति

इम्फाल (मणिपुर)

795 001

14

उ. पूर्वांचल राष्ट्र भाषा प्रचार समिति

उत्तर लखीमपुर (असम)

787 001

15

गोवा राष्ट्र भाषा प्रचार समिति

मडगांव (गोवा)

403 601

16

दिल्ली प्रान्तीय राष्ट्र भाषा प्रचार समिति

नई दिल्ली

110 017

17

नागालैण्ड राष्ट्र भाषा प्रचार समिति,

डीमापुर (नागालैण्ड)

797 112

18

जम्मू-कश्‍मीर राष्ट्र भाषा प्रचार समिति,

जम्मू (कश्‍मीर)

180 013

19

हरियाणा राष्ट्र भाषा प्रचार समिति

गुड़गाँव (हरियाणा)

122 004

20

पश्‍चिम बंग राष्ट्र भाषा प्रचार सभा,

परगना, कोलकाता

700 092

21

त्रिपुरा राष्ट्र भाषा प्रचार समिति

रागना-धर्मनगर (नार्थ त्रिपुरा)

799 251

22

मिजोरम राष्ट्र भाषा प्रचार समिति,

लुंगलेई (मिजोरम)

796 701

23

छत्तीसगढ़ राष्ट्र भाषा प्रचार समिति,

रायपुर (छत्तीसगढ़)

492 001

राष्ट्रीय भावनाओं को जागृत करना और समग्र भारतीयों के हृदय में एकात्मता स्थापित करना, समिति का प्रमुख ध्येय है। इस ध्येय की सफलता के लिए सम्पूर्ण भारत में विशाल प्रचार-तंत्र का निर्माण करना आवश्‍यक था। समिति का मुख्य कार्यालय तो वर्धा में रखा गया, लेकिन हिन्दी के प्रचार-प्रसार को सुचारू रूप से सम्पन्न करने के लिए पूरे देश को मुख्यतः 23 प्रदेशों में विभाजित करके प्रान्तीय समितियाँ स्थापित कर दी गर्इं। ये सब समितियाँ अपने-अपने प्रदेशों में कार्यरत हैं। अनेक प्रान्तीय समितियों के अपने-अपने भवन भी है। ये समितियाँ वर्धा स्थित केन्द्रीय कार्यालय के सुयोग्य नेतृत्व  में विगत 75 वर्षों से हिन्दी प्रचार-प्रसार का कार्य सफलतापूर्वक कर रही है। 

 

उपलब्धियाँ

विशेष पहल